झारखंड में भ्रष्टाचार: ‘लूटखंड’ की कहानी

झारखंड में भ्रष्टाचार: ‘लूटखंड’ की कहानी

झारखंड, भारत का एक प्राचीन और समृद्धि से भरपूर राज्य है, जिसमें हालांकि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर हैं, वहां आज भ्रष्टाचार की बढ़ती संख्या कायम है। इस लेख में, हम झारखंड में हो रहे घोटालों और भ्रष्टाचार की चर्चा करेंगे, जिससे यह प्रतित लगता है कि यह राज्य ‘लूटखंड’ की दिशा में बदल रहा है।

भ्रष्टाचार का प्रारंभ

झारखंड में हो रहे घोटालों के आरोपों ने राज्य के मंत्री-मुख्यमंत्री समेत कई प्रमुख राजनेताओं को जेल जाने का सामना कराया है। बिहार की तुलना में झारखंड अब ‘लूटखंड’ कहलाने के लायक है, जहां भ्रष्टाचार ने राजनीति को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। यहां के सीएम से लेकर अन्य कई उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को भी घोटाले में शामिल होने का आरोप है।

भ्रष्टाचार के निशाने पर अधिकारीगण

झारखंड के दो आईएएस अफसर, पूजा सिंघल और छविरंजन, भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर जेल की हवा खा रहे हैं। इसके साथ ही, चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम भी शिकंजे में हैं। पूर्व सीएम मधु कोड़ा और उनके कई मंत्रिमंडलीय सहयोगी भी जेल की हवा खा चुके हैं।

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बिजली घोटाला

झारखंड में हो रहे बिजली घोटाले में भी राज्य के कई प्रमुख अधिकारियों को शामिल होने का आरोप है। इसमें बिजली विभाग के कई अधिकारी और निजी कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार के माध्यम से बिजली विभाग की धनराशि में बड़ी घातक हानि किया है।

हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप और जांच

मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं, और उनसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पूछताछ की है। क्या हेमंत सोरेन को भी गिरफ्तार किया जाएगा? इस सवाल पर हंसी की बात तो है, लेकिन इसकी जांच तो तेजी से बढ़ रही है।

राजनीति में भ्रष्टाचार: पूजा सिंघल का मामला

झारखंड के आईएएस अफसर पूजा सिंघल के मामले में 19 करोड़ रुपये की बड़ी घोटाला सामने आई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में आईएएस अफसर सिंघल को गिरफ्तार किया गया था, जिनके ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी। यह घड़ीचक्कर झारखंड के भ्रष्टाचार के स्तर को दिखाता है और यह भी कि कैसे सरकारी अधिकारी अपनी लालसी भावना में एक बेहद सामर्थ्यशाली अफसर बन जाते हैं।

भ्रष्टाचार का आँधी: तमिलनाडु का सबक

झारखंड में हो रहे भ्रष्टाचार के मामले में तमिलनाडु की सीएम जयललिता की याद आती है। उनके घर से होने वाले बड़े पैमाने पर नकदी बरामद होने के बाद उन्होंने राजनीतिक तौर पर बड़ा दुख झेला था। क्या झारखंड इससे सीखेगा?

समापन: कैसे रुकेगा झारखंड का भ्रष्टाचार?

झारखंड का भ्रष्टाचार बड़ी चुनौती है, लेकिन सही दिशा में कदम बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। न्यायिक तंत्र को मजबूत करने, लोगों को जागरूक करने और भ्रष्ट अधिकारियों को सजा दिलाने के माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करके, इस समस्या का समाधान संभव है।झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सामूहिक जागरूकता और सकारात्मक कदमों की जरूरत है ताकि इस सूबे को न्याय, सत्य, और ईमानदारी के मार्ग पर चलने का एक नया दौर शुरू हो सके।

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